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गर्मी में भक्तिभाव से भगवान महाकाल को अर्पित होगी शीतलता—11 पवित्र कलशों से होगी जलधारा, दो महीने तक चलेगा विशेष अभिषेक
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन नगरी में एक बार फिर से सनातन परंपरा और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। प्रदेश में बढ़ती गर्मी के बीच, 13 अप्रैल, वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकालेश्वर को शीतलता देने के लिए विशेष जलाभिषेक की परंपरा शुरू की जा रही है। हर वर्ष की भांति इस बार भी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के गर्भगृह में 11 मिट्टी के मटकों (कलशों) से सतत जलधारा प्रवाहित की जाएगी, जो लगातार दो महीने, अर्थात ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगी।
प्रातःकाल होने वाली भस्म आरती के ठीक बाद, सुबह 6 बजे गर्भगृह में भगवान शिव के पवित्र लिंग पर ये 11 मटके सावधानीपूर्वक बांधे जाएंगे। इन मटकों से दिनभर, सुबह 6 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक जल की अविरल धाराएं प्रवाहित होती रहेंगी।
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश गुरु बताते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। गर्मी के दिनों में भगवान को शीतलता देने की यह अनूठी साधना है, जिसमें चांदी के नियमित अभिषेक कलश के साथ-साथ 11 विशेष मिट्टी के कलश और जोड़े जाते हैं। इन कलशों पर गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी, सरस्वती और अन्य पवित्र नदियों के नाम अंकित रहते हैं, जिससे यह प्रतीकात्मक संदेश जाता है कि समस्त पावन नदियों की ऊर्जा और आस्था का संगम इस जलधारा में समाहित है। मान्यता है कि इस निर्बाध जलधारा से भगवान महाकाल तृप्त होकर अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, आरोग्यता और शांति का आशीर्वाद देते हैं।